Correct Answer:
Option D - आदर्शवादी सिद्धान्त का प्रतिपादन प्रमुख रूप से काण्ट, हीगल, ग्रीन, ब्रैडले, बोसांके आदि विचारकों द्वारा किया गया है। इस सिद्धान्त का जन्म प्लेटों और अरस्तू के विचारों से हुआ और इसके अनुसार राज्य एक प्राकृतिक एवं स्वयं पूर्ण संस्था है और व्यक्ति राज्य के अंतर्गत रहकर ही अपने व्यक्तित्व का सर्वोच्च विकास कर सकता है। इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य स्वयं में एक साध्य है। बोंसांके ने इसे दार्शनिक सिद्धान्त तथा हाँबहाऊस ने आध्यात्मिक सिद्धान्त नाम दिया है। बेन्थम उपयोगितावादी विचारक हैं।
D. आदर्शवादी सिद्धान्त का प्रतिपादन प्रमुख रूप से काण्ट, हीगल, ग्रीन, ब्रैडले, बोसांके आदि विचारकों द्वारा किया गया है। इस सिद्धान्त का जन्म प्लेटों और अरस्तू के विचारों से हुआ और इसके अनुसार राज्य एक प्राकृतिक एवं स्वयं पूर्ण संस्था है और व्यक्ति राज्य के अंतर्गत रहकर ही अपने व्यक्तित्व का सर्वोच्च विकास कर सकता है। इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य स्वयं में एक साध्य है। बोंसांके ने इसे दार्शनिक सिद्धान्त तथा हाँबहाऊस ने आध्यात्मिक सिद्धान्त नाम दिया है। बेन्थम उपयोगितावादी विचारक हैं।