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Q: ज्वालामुखी क्रिया की अंतिम प्रतीक क्या हैं?
  • A. गेसर
  • B. क्रेटर
  • C. धुँआरे (वातिमुख)
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - ज्वालामुखी पृथ्वी पर घटित होने वाली एक आकस्मिक घटना है, इससे भू-पटल पर अचानक विस्फोट होता है, जिसके माध्यम से लावा, गैस, राख, कंकड़, पत्थर, धुँआ आदि बाहर निकलते हैं। इन सभी वस्तुओं का निकास एक प्राकृतिक नली द्वारा होता है, जिसे निकास नलिका कहते हैं। लावा पृथ्वी से बाहर आने के लिए एक छिद्र बनाता है, जिसे विवर या क्रेटर कहते हैं। लावा अपने विवर के आस-पास जम जाता है और एक शंक्वाकार पर्वत बनाता है, जिसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के माध्यम से ठोस पदार्थ, तरल पदार्थ एवं गैसीय पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के समय निकलने वाली प्रमुख गैसें हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन-डाई-सल्फाइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं अमोनिया क्लोराइड है। गैसों में जलवाष्प का महत्व सबसे अधिक है, ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाली गैसों में 60 से 90% भाग जलवाष्प का ही होता है। ज्वालामुखी क्रिया की अंतिम प्रतीक धुँआरे (वातिमुख) होता है। इनसे गैस व जलवाष्प निकला करते हैं। अलास्का (USA) के कटमई पर्वत को हजारों धुँआरों की घाटी कहा जाता है।
C. ज्वालामुखी पृथ्वी पर घटित होने वाली एक आकस्मिक घटना है, इससे भू-पटल पर अचानक विस्फोट होता है, जिसके माध्यम से लावा, गैस, राख, कंकड़, पत्थर, धुँआ आदि बाहर निकलते हैं। इन सभी वस्तुओं का निकास एक प्राकृतिक नली द्वारा होता है, जिसे निकास नलिका कहते हैं। लावा पृथ्वी से बाहर आने के लिए एक छिद्र बनाता है, जिसे विवर या क्रेटर कहते हैं। लावा अपने विवर के आस-पास जम जाता है और एक शंक्वाकार पर्वत बनाता है, जिसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के माध्यम से ठोस पदार्थ, तरल पदार्थ एवं गैसीय पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के समय निकलने वाली प्रमुख गैसें हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन-डाई-सल्फाइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं अमोनिया क्लोराइड है। गैसों में जलवाष्प का महत्व सबसे अधिक है, ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाली गैसों में 60 से 90% भाग जलवाष्प का ही होता है। ज्वालामुखी क्रिया की अंतिम प्रतीक धुँआरे (वातिमुख) होता है। इनसे गैस व जलवाष्प निकला करते हैं। अलास्का (USA) के कटमई पर्वत को हजारों धुँआरों की घाटी कहा जाता है।

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ज्वालामुखी पृथ्वी पर घटित होने वाली एक आकस्मिक घटना है, इससे भू-पटल पर अचानक विस्फोट होता है, जिसके माध्यम से लावा, गैस, राख, कंकड़, पत्थर, धुँआ आदि बाहर निकलते हैं। इन सभी वस्तुओं का निकास एक प्राकृतिक नली द्वारा होता है, जिसे निकास नलिका कहते हैं। लावा पृथ्वी से बाहर आने के लिए एक छिद्र बनाता है, जिसे विवर या क्रेटर कहते हैं। लावा अपने विवर के आस-पास जम जाता है और एक शंक्वाकार पर्वत बनाता है, जिसे ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के माध्यम से ठोस पदार्थ, तरल पदार्थ एवं गैसीय पदार्थ बाहर निकलते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के समय निकलने वाली प्रमुख गैसें हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन-डाई-सल्फाइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं अमोनिया क्लोराइड है। गैसों में जलवाष्प का महत्व सबसे अधिक है, ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाली गैसों में 60 से 90% भाग जलवाष्प का ही होता है। ज्वालामुखी क्रिया की अंतिम प्रतीक धुँआरे (वातिमुख) होता है। इनसे गैस व जलवाष्प निकला करते हैं। अलास्का (USA) के कटमई पर्वत को हजारों धुँआरों की घाटी कहा जाता है।