search
Q: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करने का प्रयोजन है –
  • A. शीघ्र विचारण
  • B. समयबद्ध विचारण
  • C. पीडि़तों के लिए विशेष सुरक्षा
  • D. उपर्युक्त सभी
Correct Answer: Option A - अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 14 के अनुसार अधीन अपराधों का शीघ्र विचारण करने के लिये सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विर्निदिष्ट करने का प्रयोजन शामिल है।
A. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 14 के अनुसार अधीन अपराधों का शीघ्र विचारण करने के लिये सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विर्निदिष्ट करने का प्रयोजन शामिल है।

Explanations:

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 14 के अनुसार अधीन अपराधों का शीघ्र विचारण करने के लिये सेशन न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विर्निदिष्ट करने का प्रयोजन शामिल है।