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Q: भूमिगत या अघोपृष्ठीय जल निकास से क्या लाभ नहीं होता है?
  • A. मृदा जल दशाओं में सुधार होता है
  • B. भूमि की जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है
  • C. पौधों के जड़ क्षेत्र में वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ विकसित होती हैं।
  • D. यह आसान व सस्ती विधि है।
Correct Answer: Option D - भूमिगत या अधोपृष्ठीय जल निकासी से होने वाले लाभ हैं- पौधों के जड़ क्षेत्र में वायु संचार में संतोषजनक सुधार होता है, मृदा जल दशाओं में सुधार होता है, पौधों के जड़ क्षेत्र में वृद्धि के लिए अनुुकूल परिस्थितिया मिल जाती है। यह थोड़ी मंहगी विधि है तथा इसके निर्माण में पैसा ज्यादा खर्च होता है।
D. भूमिगत या अधोपृष्ठीय जल निकासी से होने वाले लाभ हैं- पौधों के जड़ क्षेत्र में वायु संचार में संतोषजनक सुधार होता है, मृदा जल दशाओं में सुधार होता है, पौधों के जड़ क्षेत्र में वृद्धि के लिए अनुुकूल परिस्थितिया मिल जाती है। यह थोड़ी मंहगी विधि है तथा इसके निर्माण में पैसा ज्यादा खर्च होता है।

Explanations:

भूमिगत या अधोपृष्ठीय जल निकासी से होने वाले लाभ हैं- पौधों के जड़ क्षेत्र में वायु संचार में संतोषजनक सुधार होता है, मृदा जल दशाओं में सुधार होता है, पौधों के जड़ क्षेत्र में वृद्धि के लिए अनुुकूल परिस्थितिया मिल जाती है। यह थोड़ी मंहगी विधि है तथा इसके निर्माण में पैसा ज्यादा खर्च होता है।