Correct Answer:
Option B - संस्कृत के महाकवि भवभूति ने तीन नाटकों की रचना की – (a) मालतीमाधवम्, (b) महावीरचरिम्, (c) उत्तररामचरितम्। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड की कथा पर आधारित `उत्तररामचरितम्' करुण रस प्रधान रचना है। भवभूति ने करुण को ही एकमात्र रस माना है तथा शृंंगारादि अन्य रसों को करुण रस का ही विकार माना है। भवभूति ने लिखा है–
एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद्।
भिन्न: पृथक् पृथकगिव श्रुयते विवर्तान्।।
B. संस्कृत के महाकवि भवभूति ने तीन नाटकों की रचना की – (a) मालतीमाधवम्, (b) महावीरचरिम्, (c) उत्तररामचरितम्। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड की कथा पर आधारित `उत्तररामचरितम्' करुण रस प्रधान रचना है। भवभूति ने करुण को ही एकमात्र रस माना है तथा शृंंगारादि अन्य रसों को करुण रस का ही विकार माना है। भवभूति ने लिखा है–
एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद्।
भिन्न: पृथक् पृथकगिव श्रुयते विवर्तान्।।