Correct Answer:
Option D - ‘‘सूर कवित सुनि कौन कवि जो नहिं सिर चालन करै।’’ सूरदास के संबंध में यह प्रशस्तिकथन ‘नाभादास’ का है। नाभादास ने हिन्दी भक्तमाल की परम्परा का सूत्रपात किया। इनके गुरु का नाम ‘अग्रदास’ था। नाभादास ने सन् 1585 ई. के आस पास ब्रजभाषा में भक्तमाल की रचना की। ‘भक्तमाल’ में 200 कवियों की जीवनवृत्त और उनकी भक्ति की महिमासूचक बातों को 316 छप्पयों में लिखा गया है।
D. ‘‘सूर कवित सुनि कौन कवि जो नहिं सिर चालन करै।’’ सूरदास के संबंध में यह प्रशस्तिकथन ‘नाभादास’ का है। नाभादास ने हिन्दी भक्तमाल की परम्परा का सूत्रपात किया। इनके गुरु का नाम ‘अग्रदास’ था। नाभादास ने सन् 1585 ई. के आस पास ब्रजभाषा में भक्तमाल की रचना की। ‘भक्तमाल’ में 200 कवियों की जीवनवृत्त और उनकी भक्ति की महिमासूचक बातों को 316 छप्पयों में लिखा गया है।