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Q: समूह में एक-दूसरे को पढ़ाने और सहायता करने से-
  • A. बच्चों का ध्यान भंग हो सकता है और यह एक प्रभावशाली शैक्षिक पद्धति नहीं है।
  • B. बच्चों में प्रतिस्पर्धात्मक प्रवृत्ति उत्पन्न होती है, जो कि अधिगम में विघ्न/रुकावट पैदा करती है।
  • C. बच्चे स्वयं की चिंतन प्रक्रिया पर आक्षेप कर सकते हैं और संज्ञानात्मक क्रियाकलाप के उच्च स्तर पर पहुँच सकते हैं।
  • D. बच्चों में भ्रांति उत्पन्न हो सकती है, जो उनके अधिगम में हस्तक्षेप करती है।
Correct Answer: Option C - समूह में एक-दूसरे को पढ़ाने और सहायता करने से बच्चे स्वयं की चिंतन प्रक्रिया पर आक्षेप कर सकते हैं और संज्ञानात्मक क्रियाकलाप के उच्च स्तर पर पहुँच सकते हैं। जब बच्चे एक-दूसरे से चर्चा-परिचर्चा, संवाद, वाद-विवाद या बातचीत करते हैं तो वे एक-दूसरे के विचारों, भावनाओं, मनोवृत्तियों आदि से परिचित होते हैं, जो उन्हें सोचने, समझने और खोज करने के लिए प्रेरित करता है। इससे उनका अधिगम स्थायी होता है और उनमें रचनात्मकता का विकास होता है।
C. समूह में एक-दूसरे को पढ़ाने और सहायता करने से बच्चे स्वयं की चिंतन प्रक्रिया पर आक्षेप कर सकते हैं और संज्ञानात्मक क्रियाकलाप के उच्च स्तर पर पहुँच सकते हैं। जब बच्चे एक-दूसरे से चर्चा-परिचर्चा, संवाद, वाद-विवाद या बातचीत करते हैं तो वे एक-दूसरे के विचारों, भावनाओं, मनोवृत्तियों आदि से परिचित होते हैं, जो उन्हें सोचने, समझने और खोज करने के लिए प्रेरित करता है। इससे उनका अधिगम स्थायी होता है और उनमें रचनात्मकता का विकास होता है।

Explanations:

समूह में एक-दूसरे को पढ़ाने और सहायता करने से बच्चे स्वयं की चिंतन प्रक्रिया पर आक्षेप कर सकते हैं और संज्ञानात्मक क्रियाकलाप के उच्च स्तर पर पहुँच सकते हैं। जब बच्चे एक-दूसरे से चर्चा-परिचर्चा, संवाद, वाद-विवाद या बातचीत करते हैं तो वे एक-दूसरे के विचारों, भावनाओं, मनोवृत्तियों आदि से परिचित होते हैं, जो उन्हें सोचने, समझने और खोज करने के लिए प्रेरित करता है। इससे उनका अधिगम स्थायी होता है और उनमें रचनात्मकता का विकास होता है।