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Q: ‘‘सच है, वीरता जब भागती है, तब उसके पैरों से राजनीतिक छल-छन्द की धूल उड़ती है।’’ यह कथन ‘प्रसाद’ कृत किस नाटक का संवाद है?
  • A. ‘चन्द्रगुप्त’
  • B. ‘स्कन्दगुप्त’
  • C. अजातशत्रु’
  • D. ‘ध्रुवस्वामिनी’
Correct Answer: Option D - व्याख्या उपर्युक्त कथन ‘प्रसाद’ कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का संवाद है। उक्त कथन ‘मन्दाकिनी’ द्वारा कहा गया है। प्रसाद जी के अन्य नाटक हैं- चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, सज्जन, कल्याणी परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, जनमेजय का नागयज्ञ इत्यादि।
D. व्याख्या उपर्युक्त कथन ‘प्रसाद’ कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का संवाद है। उक्त कथन ‘मन्दाकिनी’ द्वारा कहा गया है। प्रसाद जी के अन्य नाटक हैं- चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, सज्जन, कल्याणी परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, जनमेजय का नागयज्ञ इत्यादि।

Explanations:

व्याख्या उपर्युक्त कथन ‘प्रसाद’ कृत ‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक का संवाद है। उक्त कथन ‘मन्दाकिनी’ द्वारा कहा गया है। प्रसाद जी के अन्य नाटक हैं- चन्द्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, अजातशत्रु, सज्जन, कल्याणी परिणय, करुणालय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, जनमेजय का नागयज्ञ इत्यादि।