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Q: उत्तर प्रदेश का प्राथमिक लोक गीत प्रकार है :
  • A. धमार
  • B. बिरहा
  • C. टप्पा
  • D. कव्वाली
Correct Answer: Option B - उत्तर प्रदेश का प्राथमिक लोक गीत बिरहा है। धमार – हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त तालों में से एक यह ध्रुपद शैली से जुड़ा है। टप्पा शैली – इस शैली में लय बहुत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि रचना तीव्र, सूक्ष्म और जटिल होती है। इसका उद्भव उत्तर-पश्चिम भारत के ऊंट सवारों के लोकगीत से हुआ था लेकिन सम्राट मुहम्मद शाह के मुगल दरबार में प्रवेश करने पर इसे अर्द्धशास्त्रीय स्वरीय विशेषता के रूप में मान्यता प्रदान की गई। कव्वाली – कव्वाली भक्ति संगीत का एक रूप है जो दक्षिण एशिया, मुख्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के क्षेत्रों में इस्लाम की रहस्यमय सूफी प्रथा को व्यक्त करता है।
B. उत्तर प्रदेश का प्राथमिक लोक गीत बिरहा है। धमार – हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त तालों में से एक यह ध्रुपद शैली से जुड़ा है। टप्पा शैली – इस शैली में लय बहुत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि रचना तीव्र, सूक्ष्म और जटिल होती है। इसका उद्भव उत्तर-पश्चिम भारत के ऊंट सवारों के लोकगीत से हुआ था लेकिन सम्राट मुहम्मद शाह के मुगल दरबार में प्रवेश करने पर इसे अर्द्धशास्त्रीय स्वरीय विशेषता के रूप में मान्यता प्रदान की गई। कव्वाली – कव्वाली भक्ति संगीत का एक रूप है जो दक्षिण एशिया, मुख्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के क्षेत्रों में इस्लाम की रहस्यमय सूफी प्रथा को व्यक्त करता है।

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उत्तर प्रदेश का प्राथमिक लोक गीत बिरहा है। धमार – हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त तालों में से एक यह ध्रुपद शैली से जुड़ा है। टप्पा शैली – इस शैली में लय बहुत महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि रचना तीव्र, सूक्ष्म और जटिल होती है। इसका उद्भव उत्तर-पश्चिम भारत के ऊंट सवारों के लोकगीत से हुआ था लेकिन सम्राट मुहम्मद शाह के मुगल दरबार में प्रवेश करने पर इसे अर्द्धशास्त्रीय स्वरीय विशेषता के रूप में मान्यता प्रदान की गई। कव्वाली – कव्वाली भक्ति संगीत का एक रूप है जो दक्षिण एशिया, मुख्य रूप से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के क्षेत्रों में इस्लाम की रहस्यमय सूफी प्रथा को व्यक्त करता है।