Correct Answer:
Option D - अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि शंकराचार्य थे। अद्वैतवाद में ब्रह्म का विवेचन निर्गुण रूप में किया गया है। अद्वैतवाद के प्रचार-प्रसार के लिए शंकराचार्य ने भारत की चारों दिशाओं में चार मठस्थापित किए। उन्होंने उपनिषदों, वेदान्त सूत्रों तथा गीता पर टीकाएँ भी लिखी, जिनका भारतीय दर्शन में महत्वपूर्ण स्थान है।
D. अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि शंकराचार्य थे। अद्वैतवाद में ब्रह्म का विवेचन निर्गुण रूप में किया गया है। अद्वैतवाद के प्रचार-प्रसार के लिए शंकराचार्य ने भारत की चारों दिशाओं में चार मठस्थापित किए। उन्होंने उपनिषदों, वेदान्त सूत्रों तथा गीता पर टीकाएँ भी लिखी, जिनका भारतीय दर्शन में महत्वपूर्ण स्थान है।