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Q: Why is monitoring pH crucial for understanding the impacts of acid rain on soil and water ecosystems? मृदा और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर अम्लीय वर्षा के प्रभावों को समझने के लिए ज्प् का अनुवीक्षण करना क्यों महत्वपूर्ण होता है?
  • A. Acid rain only makes the water taste sour./अम्लीय वर्षा से जल का स्वाद खट्टा हो जाता है।
  • B. Acid rain does not affect soil and water ecosystems./अम्लीय वर्षा मृदा और जल पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित नहीं करती है।
  • C. Acid rain decreases the pH, harming aquatic life and soil nutrient availability/अम्लीय वर्षा से pH कम हो जाता है, जिससे जलीय और मृदा पोषक तत्वों की उपलब्धता को हानि पहुंचती है।
  • D. Acid rain increases the pH of soil and water bodies../अम्लीय वर्षा से मृदा और जल निकायों का pH बढ़ जाता है।
Correct Answer: Option C - मृदा और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर अम्लीय वर्षा के प्रभावों को समझने के लिए pH का अनुवीक्षण करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अम्लीय वर्षा से pH कम हो जाता है जिससे जलीय और मृदा पोषक तत्वों की उपलब्धता को हानि पहुँचती है। वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है, तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। अम्लीय वर्षा के लिए प्रदूषकों की उच्च सान्द्रता आवश्यक है, जोकि आमतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों के निकटवर्ती क्षेत्रों में होती है। अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO₂) के वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करने से बनती है।
C. मृदा और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर अम्लीय वर्षा के प्रभावों को समझने के लिए pH का अनुवीक्षण करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अम्लीय वर्षा से pH कम हो जाता है जिससे जलीय और मृदा पोषक तत्वों की उपलब्धता को हानि पहुँचती है। वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है, तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। अम्लीय वर्षा के लिए प्रदूषकों की उच्च सान्द्रता आवश्यक है, जोकि आमतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों के निकटवर्ती क्षेत्रों में होती है। अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO₂) के वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करने से बनती है।

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मृदा और जल पारिस्थितिकी तंत्र पर अम्लीय वर्षा के प्रभावों को समझने के लिए pH का अनुवीक्षण करना इसलिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अम्लीय वर्षा से pH कम हो जाता है जिससे जलीय और मृदा पोषक तत्वों की उपलब्धता को हानि पहुँचती है। वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है, तो वह अम्लीय वर्षा कहलाती है। अम्लीय वर्षा के लिए प्रदूषकों की उच्च सान्द्रता आवश्यक है, जोकि आमतौर पर औद्योगिक क्षेत्रों के निकटवर्ती क्षेत्रों में होती है। अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO₂) के वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करने से बनती है।