Correct Answer:
Option D - ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ अर्थात् रुचि तथा उसके समानार्थक धातुओं के प्रयोग में प्रसन्न होने वाला सम्प्रदान होने से उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे- ‘हरये रोचते भक्ति:’ में हरि को प्रसन्न होना है अत: हरि में चतुर्थी विभक्ति है।
D. ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ अर्थात् रुचि तथा उसके समानार्थक धातुओं के प्रयोग में प्रसन्न होने वाला सम्प्रदान होने से उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे- ‘हरये रोचते भक्ति:’ में हरि को प्रसन्न होना है अत: हरि में चतुर्थी विभक्ति है।