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Q: ‘पूर्वमनेन देशनायकत्वमङ्गीकृत्य’ इत्यत्र ‘अनेन’ इत्यस्य का व्युत्पत्ति: ?
  • A. अदस् तृतीयाविभक्ति: एकवचनम् स्त्रीलिङ्गम्
  • B. इदम् तृतीयाविभक्ति: एकवचनम् पुँल्लिङ्गम्
  • C. अदस् तृतीयाविभक्ति: एकवचनम् पुँल्लिङ्गम्
  • D. इदम् तृतीयाविभक्ति: एकवचनम् स्त्रीलिङ्गम्
Correct Answer: Option A - ‘देशवासिन: शोकेनाकुलयन्’ इत्यत्र ‘आकुलयन्’ इत्यस्मिन् पदे कुल् धातु: शतृप्रत्यय:। ‘आकुलयन्’ पद में कुल धातु एवं शतृ प्रत्यय है। शतृ और शानच् की सत् संज्ञा होती है। सत् का अर्थ है ‘विद्यमान’, वर्तमान’। शतृ परस्मैपदी धातुओं के अनन्तर तथा शानच् आत्मनेपदी धातुओं के अनन्तर जोड़ा जाता है। शतृ का ‘अत्’ शेष बचता है।
A. ‘देशवासिन: शोकेनाकुलयन्’ इत्यत्र ‘आकुलयन्’ इत्यस्मिन् पदे कुल् धातु: शतृप्रत्यय:। ‘आकुलयन्’ पद में कुल धातु एवं शतृ प्रत्यय है। शतृ और शानच् की सत् संज्ञा होती है। सत् का अर्थ है ‘विद्यमान’, वर्तमान’। शतृ परस्मैपदी धातुओं के अनन्तर तथा शानच् आत्मनेपदी धातुओं के अनन्तर जोड़ा जाता है। शतृ का ‘अत्’ शेष बचता है।

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‘देशवासिन: शोकेनाकुलयन्’ इत्यत्र ‘आकुलयन्’ इत्यस्मिन् पदे कुल् धातु: शतृप्रत्यय:। ‘आकुलयन्’ पद में कुल धातु एवं शतृ प्रत्यय है। शतृ और शानच् की सत् संज्ञा होती है। सत् का अर्थ है ‘विद्यमान’, वर्तमान’। शतृ परस्मैपदी धातुओं के अनन्तर तथा शानच् आत्मनेपदी धातुओं के अनन्तर जोड़ा जाता है। शतृ का ‘अत्’ शेष बचता है।