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Q: ‘परमशून्य’ वह तापमान है जिस पर...............
  • A. गैसों में आण्विक गति घटने लगती है
  • B. जल जमने लगता है
  • C. सभी गैसें तरलीय हो जाती हैं
  • D. सभी गैसें ठोस में परिवर्तित हो जाती है
Correct Answer: Option A - परम शून्य ताप पर गैसों में आण्विक गति घटने लगती या शून्य हो जाती है। यह तापमान की विशुद्ध माप है। उष्मागतिकी के द्वितीय नियम के द्वारा यह परिभाषित है। सिद्धान्तत: न्यूनतम सम्भव ताप- 273ºC या 0 K को माना जाता है। इस ताप पर पदार्थ अणुओं की ऊर्जा न्यूनतम हो जाती है। फलस्वरूप उनकी आण्विक गति घटने लगती है। अर्थात पदार्थ इससे कम ठण्डे नहीं हो सकते। व्यवहार में इससे कम ताप सम्भव नहीं हैं।
A. परम शून्य ताप पर गैसों में आण्विक गति घटने लगती या शून्य हो जाती है। यह तापमान की विशुद्ध माप है। उष्मागतिकी के द्वितीय नियम के द्वारा यह परिभाषित है। सिद्धान्तत: न्यूनतम सम्भव ताप- 273ºC या 0 K को माना जाता है। इस ताप पर पदार्थ अणुओं की ऊर्जा न्यूनतम हो जाती है। फलस्वरूप उनकी आण्विक गति घटने लगती है। अर्थात पदार्थ इससे कम ठण्डे नहीं हो सकते। व्यवहार में इससे कम ताप सम्भव नहीं हैं।

Explanations:

परम शून्य ताप पर गैसों में आण्विक गति घटने लगती या शून्य हो जाती है। यह तापमान की विशुद्ध माप है। उष्मागतिकी के द्वितीय नियम के द्वारा यह परिभाषित है। सिद्धान्तत: न्यूनतम सम्भव ताप- 273ºC या 0 K को माना जाता है। इस ताप पर पदार्थ अणुओं की ऊर्जा न्यूनतम हो जाती है। फलस्वरूप उनकी आण्विक गति घटने लगती है। अर्थात पदार्थ इससे कम ठण्डे नहीं हो सकते। व्यवहार में इससे कम ताप सम्भव नहीं हैं।