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Q: लिपि के विकास का क्रमिक सोपान है
  • A. सूत्र लिपि, चित्र लिपि, प्रतीकात्मक लिपि, भावमूलक लिपि
  • B. भावमूलक लिपि, सूत्र लिपि, चित्र लिपि, प्रतीकात्मक लिपि
  • C. चित्र लिपि, सूत्र लिपि, प्रतीकात्मक लिपि, भाावमूलक लिपि
  • D. सूत्र लिपि, भावमूलक लिपि, चित्र लिपि, प्रतीकात्मक लिपि
Correct Answer: Option C - लिपि के विकास का क्रमिक सोपान- चित्र लिपि → सूत्र लिपि → प्रतीकात्मक लिपि → भावमूलक लिपि है। ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नो का प्रयोग किया जाता है, वह लिपि कहलाती है। उदय नारायण तिवारी जी ने लिपि के विकास की चार अवस्थाएँ मानी हैं- चित्र लिपि, भाव संकेत लिपि, वर्णात्मक लिपि तथा अक्षरात्मक लिपि। इस प्रकार अधिकांश विद्वानों ने अपने मतानुसार लिपि के विकास के अलग-अलग सोपान स्वीकार किये हैं किन्तु अधिकांश विद्वान लिपि के विकास क्रम में चित्र-लिपि को प्रथम अवस्था की लिपि स्वीकार करते हैं।
C. लिपि के विकास का क्रमिक सोपान- चित्र लिपि → सूत्र लिपि → प्रतीकात्मक लिपि → भावमूलक लिपि है। ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नो का प्रयोग किया जाता है, वह लिपि कहलाती है। उदय नारायण तिवारी जी ने लिपि के विकास की चार अवस्थाएँ मानी हैं- चित्र लिपि, भाव संकेत लिपि, वर्णात्मक लिपि तथा अक्षरात्मक लिपि। इस प्रकार अधिकांश विद्वानों ने अपने मतानुसार लिपि के विकास के अलग-अलग सोपान स्वीकार किये हैं किन्तु अधिकांश विद्वान लिपि के विकास क्रम में चित्र-लिपि को प्रथम अवस्था की लिपि स्वीकार करते हैं।

Explanations:

लिपि के विकास का क्रमिक सोपान- चित्र लिपि → सूत्र लिपि → प्रतीकात्मक लिपि → भावमूलक लिपि है। ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नो का प्रयोग किया जाता है, वह लिपि कहलाती है। उदय नारायण तिवारी जी ने लिपि के विकास की चार अवस्थाएँ मानी हैं- चित्र लिपि, भाव संकेत लिपि, वर्णात्मक लिपि तथा अक्षरात्मक लिपि। इस प्रकार अधिकांश विद्वानों ने अपने मतानुसार लिपि के विकास के अलग-अलग सोपान स्वीकार किये हैं किन्तु अधिकांश विद्वान लिपि के विकास क्रम में चित्र-लिपि को प्रथम अवस्था की लिपि स्वीकार करते हैं।