Correct Answer:
Option C - पंडित देखहु मन में जानी।
कहु धौं छूति कहाँ से उपजी, तबहिं छूति तुम मानी।।
एकहि पाट सकल बैठाए, छूति लेत धौं काकी।
छूतिहि जेवन छूतिहि अँचवन, छूतिहि जग उपजाया।
कहैं कबीर ते छूति विवरजित, जाके संग न माया।
शिक्षक को इस दोहे की व्याख्या छात्रों के समक्ष ‘अस्पृश्ता का विचार एक सामाजिक रचना है तथा हमारे विचारों और धारणाओं से निर्धारित होती है’ इस प्रकार करनी चाहिए।
C. पंडित देखहु मन में जानी।
कहु धौं छूति कहाँ से उपजी, तबहिं छूति तुम मानी।।
एकहि पाट सकल बैठाए, छूति लेत धौं काकी।
छूतिहि जेवन छूतिहि अँचवन, छूतिहि जग उपजाया।
कहैं कबीर ते छूति विवरजित, जाके संग न माया।
शिक्षक को इस दोहे की व्याख्या छात्रों के समक्ष ‘अस्पृश्ता का विचार एक सामाजिक रचना है तथा हमारे विचारों और धारणाओं से निर्धारित होती है’ इस प्रकार करनी चाहिए।