Correct Answer:
Option B - हेडलाइन मुद्रास्फीति, मुद्रास्फीति का कच्चा आंकड़ा है, जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर तैयार किया जाता है। इसमें प्राथमिक वस्तुओं सहित खाद्य एवं ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी सम्मिलित किया जाता है। हेडलाइन मुद्रास्फीति तात्कलिक झटकों से प्रभावित होती है क्योंकि इसमें खाद्य एवं ईंधन जैसी त्वरित उतार-चढ़ाव कीमत वाली वस्तुएं शामिल होती है। हेडलाइन मुद्रास्फीति में से खाद्य एवं ईंधन के घटकों को हटाने पर हम कोर मुद्रास्फीति का मापन कर सकते है क्योंकि कोर मुद्रास्फीति में खाद्य, ईंधन तथा ऐसे मदों को शामिल नहीं किया जाता, जो किसी अर्थव्यवस्था में माँग और उत्पादन के पारम्परिक ढांचे से बाहर हो। इन्हें शामिल न करने का कारण यह भी है कि इनमें त्वरित परिवर्तन की आशंका बनी रहती है, ऐसे में यदि इन्हें सम्मिलित करते हुए इनके आधार पर मौद्रिक नीति का निर्माण किया जाएगा, तो त्वरित बदलते परिदृश्य में इसके आधार पर बनी नीतियों में भी परिवर्तन लाना होगा और मौद्रिक नीति सप्ताह या अर्द्धमासिक लाना व्यवहारिक नहीं होगा।
B. हेडलाइन मुद्रास्फीति, मुद्रास्फीति का कच्चा आंकड़ा है, जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर तैयार किया जाता है। इसमें प्राथमिक वस्तुओं सहित खाद्य एवं ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी सम्मिलित किया जाता है। हेडलाइन मुद्रास्फीति तात्कलिक झटकों से प्रभावित होती है क्योंकि इसमें खाद्य एवं ईंधन जैसी त्वरित उतार-चढ़ाव कीमत वाली वस्तुएं शामिल होती है। हेडलाइन मुद्रास्फीति में से खाद्य एवं ईंधन के घटकों को हटाने पर हम कोर मुद्रास्फीति का मापन कर सकते है क्योंकि कोर मुद्रास्फीति में खाद्य, ईंधन तथा ऐसे मदों को शामिल नहीं किया जाता, जो किसी अर्थव्यवस्था में माँग और उत्पादन के पारम्परिक ढांचे से बाहर हो। इन्हें शामिल न करने का कारण यह भी है कि इनमें त्वरित परिवर्तन की आशंका बनी रहती है, ऐसे में यदि इन्हें सम्मिलित करते हुए इनके आधार पर मौद्रिक नीति का निर्माण किया जाएगा, तो त्वरित बदलते परिदृश्य में इसके आधार पर बनी नीतियों में भी परिवर्तन लाना होगा और मौद्रिक नीति सप्ताह या अर्द्धमासिक लाना व्यवहारिक नहीं होगा।