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Q: Why mid-day meals are better than 'day' rations'. मध्याह्न भोजन ‘दिन के राशन’ बेहतर क्यों है? I. Mid day meal motivates children to go to school on their own without much coaxing or persuasion from their parents. I. मध्याह्न भोजन बच्चों को अपने माता-पिता से ज्यादा बहलाने या मानाने के बिना खुद स्कूल जाने के लिए प्रेरित करता है। II. Mid-day meals also make it easier to retain pupils at school after the lunch break. II. मध्याह्न भोजन लंच ब्रेक के बाद भी विद्यार्थियों को स्कूल बनाए रखना भी आसान बनाता है।
  • A. Both I and II/I तथा II दोनों
  • B. Only II/केवल II
  • C. Only I/केवल I
  • D. Neither I nor II/ना ही I ना ही II
Correct Answer: Option A - स्कूल में अधिकतर बच्चे खाली पेट पहॅुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग जाती है और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्याहन भोजन बच्चों के लिए ‘‘पूरक पोषण’’ के स्रोत और उनके स्वस्थ्य विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है। यह समतावादी मूल्यों के प्रसार में भी सहायता कर सकता है क्योंकि कक्षा मे विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं और साथ-साथ खाना खाते है। इसकी शुरुआत सन् 1961 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य- 1. प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन में वृद्धि। 2. इसके द्वारा बच्चे खुद से स्कूल आने के लिए अभिप्रेरित हो। 3. निर्बल आय वर्ग के बच्चों में शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता विकसित करना। 4. छात्रों को स्कूल में पूरे समय तक रोके रखना। विद्यालय छोड़ने की उनकी प्रवृत्ति में कमी लाना। 5. छात्रों को पौष्टिक आहार प्रदान करना। अत: दिए गए दोनों कथन (I) तथा (II) दोनों सही है।
A. स्कूल में अधिकतर बच्चे खाली पेट पहॅुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग जाती है और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्याहन भोजन बच्चों के लिए ‘‘पूरक पोषण’’ के स्रोत और उनके स्वस्थ्य विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है। यह समतावादी मूल्यों के प्रसार में भी सहायता कर सकता है क्योंकि कक्षा मे विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं और साथ-साथ खाना खाते है। इसकी शुरुआत सन् 1961 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य- 1. प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन में वृद्धि। 2. इसके द्वारा बच्चे खुद से स्कूल आने के लिए अभिप्रेरित हो। 3. निर्बल आय वर्ग के बच्चों में शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता विकसित करना। 4. छात्रों को स्कूल में पूरे समय तक रोके रखना। विद्यालय छोड़ने की उनकी प्रवृत्ति में कमी लाना। 5. छात्रों को पौष्टिक आहार प्रदान करना। अत: दिए गए दोनों कथन (I) तथा (II) दोनों सही है।

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स्कूल में अधिकतर बच्चे खाली पेट पहॅुंचते हैं। जो बच्चे स्कूल आने से पहले भोजन करते हैं उन्हें भी दोपहर तक भूख लग जाती है और वे अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। मध्याहन भोजन बच्चों के लिए ‘‘पूरक पोषण’’ के स्रोत और उनके स्वस्थ्य विकास के रूप में भी कार्य कर सकता है। यह समतावादी मूल्यों के प्रसार में भी सहायता कर सकता है क्योंकि कक्षा मे विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि वाले बच्चे साथ में बैठते हैं और साथ-साथ खाना खाते है। इसकी शुरुआत सन् 1961 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य- 1. प्राथमिक कक्षाओं में नामांकन में वृद्धि। 2. इसके द्वारा बच्चे खुद से स्कूल आने के लिए अभिप्रेरित हो। 3. निर्बल आय वर्ग के बच्चों में शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता विकसित करना। 4. छात्रों को स्कूल में पूरे समय तक रोके रखना। विद्यालय छोड़ने की उनकी प्रवृत्ति में कमी लाना। 5. छात्रों को पौष्टिक आहार प्रदान करना। अत: दिए गए दोनों कथन (I) तथा (II) दोनों सही है।