Explanations:
चक्रवाती वर्षण (Cyclonic Precipitation): चक्रवाती वर्षा दाब के अंतर के कारण एक वायु द्रव्यमान को उठाने के कारण होती है। यदि किसी क्षेत्र पर निम्न दाब पड़ता है तो हवा आस-पास के क्षैतिज रूप से प्रवाहित होगी, जिससे कम दाब वाले क्षेत्र में हवा को ऊपर उठाया जाता है। जब नम और गर्म वायु द्रव्यमान ठंडी और शुष्क द्रव्यमान से मिलती है तो चक्रवाती वर्षण होता है। पर्वतीय वर्षण (Orographic precipitation): नमयुक्त वायु का ताप के बढ़ने के कारण ऊपर उठ कर पहाड़ों (बाधाओं) से टकराकर संघनित हो कर जो वर्षा होती है उसे पर्वतीय वर्षण कहते हैं। भारत में अधिकांश भारी वर्षा के लिये पर्वतीय वर्षा ही उत्तरदायी होती है। संवहनीय वर्षण (Convective precipitation): संवहनीय वर्षण ठण्डे और घने निकायों के चारों ओर गर्म हल्की हवा के प्राकृतिक उठान के कारण होती है।