Correct Answer:
Option B - मनुष्य में मूत्रवाही नलिकाओं की संख्या लगभग 2.4 मिलियन होता है।
प्रत्येक वृक्क का प्रमुख ऊत्तक अर्थात् पैरेन्काइमा लगभग दस लाख लम्बी, महीन एवं अत्यधिक कुण्डलित नलिकाओं का एक जटिल व ठोस पिण्ड होता है। जिन्हें वृक्क नलिकाएँ या वृक्काणु कहते है। ये एक संयोजी ऊतक की थोड़ी-सी मात्रा में प्रस्पर धसी रहती है ये वृक्कों की रचनात्मक व क्रियात्मक इकाइयाँ होती है। अत: इन्हीं में मूत्र बनता है जिसमें उत्सर्जी पदार्थ घुले रहते है।
प्रत्येक किडनी में 1.25 मिलियन क्वायन के रूप में ट्यूबुल्स होतें हैं जिन्हें मूत्रवाही नलिकांए कहा जाता है। इन्हें नेफ्रान भी कहा जाता है।
B. मनुष्य में मूत्रवाही नलिकाओं की संख्या लगभग 2.4 मिलियन होता है।
प्रत्येक वृक्क का प्रमुख ऊत्तक अर्थात् पैरेन्काइमा लगभग दस लाख लम्बी, महीन एवं अत्यधिक कुण्डलित नलिकाओं का एक जटिल व ठोस पिण्ड होता है। जिन्हें वृक्क नलिकाएँ या वृक्काणु कहते है। ये एक संयोजी ऊतक की थोड़ी-सी मात्रा में प्रस्पर धसी रहती है ये वृक्कों की रचनात्मक व क्रियात्मक इकाइयाँ होती है। अत: इन्हीं में मूत्र बनता है जिसमें उत्सर्जी पदार्थ घुले रहते है।
प्रत्येक किडनी में 1.25 मिलियन क्वायन के रूप में ट्यूबुल्स होतें हैं जिन्हें मूत्रवाही नलिकांए कहा जाता है। इन्हें नेफ्रान भी कहा जाता है।