Correct Answer:
Option A - सुख-दुख दोनों ही हमारे कर्मों के फल हैं। हमें समझना चाहिए कि बिना दुख भोगे, सुख नहीं पाया जा सकता है मानवीय पुरूषार्थ करते रहें, मन की कोठरी को स्वच्छ रखें और जहाँ तक जरूरत हो, प्रायश्चित भी अवश्य करना चाहिए।
A. सुख-दुख दोनों ही हमारे कर्मों के फल हैं। हमें समझना चाहिए कि बिना दुख भोगे, सुख नहीं पाया जा सकता है मानवीय पुरूषार्थ करते रहें, मन की कोठरी को स्वच्छ रखें और जहाँ तक जरूरत हो, प्रायश्चित भी अवश्य करना चाहिए।