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Q: निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 78-81 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्य: उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखतं- जगति परोपकार एव धर्म:। परोपकार-प्रवृत्तो हि धर्मात्मा पुण्यात्मा च अस्ति। उत्तमा: पुरूषा: तु स्वार्थम् उपेक्ष्य अपि परहितसाधनतत्परा: भवन्ति। स्वोदरभरणरता; तु काककुक्करा एवं सन्ति। वयं पश्याम: हि यत् प्रकृति: अपि परहितसाधनपरा वर्तते। वृक्षा: परोपकाराय एवं सुस्वादूनि फलानि फलन्ति। नद्य: परोपकाराय एवं शीतलं जलं वहन्ति। गाव: तु परोपकाराय एवं प्रकृत्या मधुरं पय: दुहन्ति। सर्वत्र एवं प्रकृत्या परोपकारार्थ स्वशरीरमर्पितं क्रियते। अत्रैव शरीरस्य साफल्यम् अस्ति। परोपकाराय एवं पादप: तीव्रतमं स्वमुर्धिर सहमान; स्वाश्रितेभ्य: पथिकेभ्य: छायां विस्तार्य सुखं वितरित। यथा दिनकर: पद्याकरं विकासयति, निशाकर कैरवकुलं विकासयति, मेघ: जलं यच्छति। परोपकारं एवं शरीरस्य सत्यं भूषणमस्ति। ‘वहन्ति’ पदस्य कर्तृपंद किम् अस्ति?
  • A. धर्म:
  • B. नद्य:
  • C. परोपकार:
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मादधिक:
  • E. उपर्युक्तेषु किञ्चन् अपि नास्ति
Correct Answer: Option B - ‘वहन्ति’ पदस्य कर्तृपद नद्य: अस्ति। अर्थात् ‘वहन्ति’ पद का कर्तापद ‘नद्य:’ है। नद्य: परोपकाराय एवं शीतलं जलं वहन्ति। अर्थात् नदियाँ परोपकार केलिए ही शीतल जल प्रवाहित करती है। इसमें ‘नद्य:’ कर्ता पद है परोपकाराय सम्प्रदान है और शीतलं जलं कर्म तथा वहन्ति क्रियापद है।
B. ‘वहन्ति’ पदस्य कर्तृपद नद्य: अस्ति। अर्थात् ‘वहन्ति’ पद का कर्तापद ‘नद्य:’ है। नद्य: परोपकाराय एवं शीतलं जलं वहन्ति। अर्थात् नदियाँ परोपकार केलिए ही शीतल जल प्रवाहित करती है। इसमें ‘नद्य:’ कर्ता पद है परोपकाराय सम्प्रदान है और शीतलं जलं कर्म तथा वहन्ति क्रियापद है।

Explanations:

‘वहन्ति’ पदस्य कर्तृपद नद्य: अस्ति। अर्थात् ‘वहन्ति’ पद का कर्तापद ‘नद्य:’ है। नद्य: परोपकाराय एवं शीतलं जलं वहन्ति। अर्थात् नदियाँ परोपकार केलिए ही शीतल जल प्रवाहित करती है। इसमें ‘नद्य:’ कर्ता पद है परोपकाराय सम्प्रदान है और शीतलं जलं कर्म तथा वहन्ति क्रियापद है।