search
Q: In which language did the poet Mallanarya write the texts named ‘‘Bhava Chinta Ratna’’ and ‘‘Veerasaivamrita’’ in the court of Krishnadev Ray? कृष्णदेवराय के दरबार में कवि मल्लनार्य ने ``भाव चिंता रत्न ; एवं ``वीरशैवामृत ग्रंथ किस भाषा में लिखे थे?
  • A. Sanskrit/संस्कृत
  • B. Tamil/तमिल
  • C. Telugu/तेलुगू
  • D. Kannada/कन्नड़
Correct Answer: Option D - कृष्णदेव राय ने तेलुगू ग्रन्थ अमुक्तमाल्यद की रचना तेलुगु भाषा में की जिसमें उसने कहा कि ‘मुकुटधारी राजा को सदैव धर्म पर दृष्टि रखते हुये शासन करना चाहिये एवं राजा को अपने चतुर्दिक राजनीति में दक्ष लोगों को एकत्र करके शासन करना चाहिये।’ अमुक्तमाल्यद पुस्तक का मुख्य विषय राजनीतिक शासन और कला है। कृष्णदेव राय ने नांगलपुर नामक नवीन नगर बसाकर अनेक भव्य भवनों एवं मंदिरों का निर्माण करवाया। उसके दरबार में कन्नड़ भाषा के कवि मल्लनार्थ निवास करते थे। उन्होंने ‘भावचिंता रत्न एवं वीरशैवामृत’ नामक ग्रंथ की रचना कन्नड़ भाषा में किया था। रामराय विजयनगर का मंत्री था एवं सदाशिव के शासन काल में राज्य की वास्तविक शक्ति उसके हाथ में थी।
D. कृष्णदेव राय ने तेलुगू ग्रन्थ अमुक्तमाल्यद की रचना तेलुगु भाषा में की जिसमें उसने कहा कि ‘मुकुटधारी राजा को सदैव धर्म पर दृष्टि रखते हुये शासन करना चाहिये एवं राजा को अपने चतुर्दिक राजनीति में दक्ष लोगों को एकत्र करके शासन करना चाहिये।’ अमुक्तमाल्यद पुस्तक का मुख्य विषय राजनीतिक शासन और कला है। कृष्णदेव राय ने नांगलपुर नामक नवीन नगर बसाकर अनेक भव्य भवनों एवं मंदिरों का निर्माण करवाया। उसके दरबार में कन्नड़ भाषा के कवि मल्लनार्थ निवास करते थे। उन्होंने ‘भावचिंता रत्न एवं वीरशैवामृत’ नामक ग्रंथ की रचना कन्नड़ भाषा में किया था। रामराय विजयनगर का मंत्री था एवं सदाशिव के शासन काल में राज्य की वास्तविक शक्ति उसके हाथ में थी।

Explanations:

कृष्णदेव राय ने तेलुगू ग्रन्थ अमुक्तमाल्यद की रचना तेलुगु भाषा में की जिसमें उसने कहा कि ‘मुकुटधारी राजा को सदैव धर्म पर दृष्टि रखते हुये शासन करना चाहिये एवं राजा को अपने चतुर्दिक राजनीति में दक्ष लोगों को एकत्र करके शासन करना चाहिये।’ अमुक्तमाल्यद पुस्तक का मुख्य विषय राजनीतिक शासन और कला है। कृष्णदेव राय ने नांगलपुर नामक नवीन नगर बसाकर अनेक भव्य भवनों एवं मंदिरों का निर्माण करवाया। उसके दरबार में कन्नड़ भाषा के कवि मल्लनार्थ निवास करते थे। उन्होंने ‘भावचिंता रत्न एवं वीरशैवामृत’ नामक ग्रंथ की रचना कन्नड़ भाषा में किया था। रामराय विजयनगर का मंत्री था एवं सदाशिव के शासन काल में राज्य की वास्तविक शक्ति उसके हाथ में थी।