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Q: निर्देश (175-180) : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । कुछ ऐसे पूरब के गाँव की हवा चली, खपरैलों की दुनिया आँख खोलने लगी। जमे हुए धुएँ-सी पहाड़ी है दूर की, काजल की रेख-सी कतार है खजूर की सोने का कलश लिए उषा चली आ रही, माथे पर दमक रही आभा सिंदूर की। पहाड़ी को जमे हुए धुएँ-सी क्यों कहा गया होगा?
  • A. भोर से पहले के अंधकार के कारण।
  • B. भोर होने पर फैले हुए अँधेरे के कारण।
  • C. पहाड़ी पर फैक्ट्रियों का धुआँ जमने के कारण।
  • D. पहाड़ों पर फैले चूल्हे के धुएँ के कारण।
Correct Answer: Option A - काव्यांश में पहाड़ी को जमे हुए धुएँ सी कहा गया है क्योंकि भोर के पहले का अंधकार पहाड़ो पर फैले धुएँ की तरह प्रतीत होता है।
A. काव्यांश में पहाड़ी को जमे हुए धुएँ सी कहा गया है क्योंकि भोर के पहले का अंधकार पहाड़ो पर फैले धुएँ की तरह प्रतीत होता है।

Explanations:

काव्यांश में पहाड़ी को जमे हुए धुएँ सी कहा गया है क्योंकि भोर के पहले का अंधकार पहाड़ो पर फैले धुएँ की तरह प्रतीत होता है।