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Q: ‘निर्भय-भीम-व्यायोग’ के लेखक हैं
  • A. धनपाल
  • B. राजशेखर
  • C. धर्मप्रभ सूरि
  • D. रामचन्द्र सूरि
Correct Answer: Option D - ‘निर्भय-भीम-व्यायोग’ के लेखक रामचंद्र सूरि हैं। यह रूपक ग्रंथ है जिसमें भीम द्वारा वनवास में बकासुर को मारने की कथा है। वनमाला नाटिका, मल्लिकामकरंद प्रकरण, यदुविलास नाटक, रघुविलास नाटक रामचन्द्र सूरि के अन्य रूपक ग्रंथ हैं। रामचन्द्र सूरि जैन आचार्य थे। इनका समय संवत् 1145 से 1230 का है, इन्होंने संस्कृत में 11 नाटक लिखे हैं। इनके गुरु का नाम हेमचंद्र था।
D. ‘निर्भय-भीम-व्यायोग’ के लेखक रामचंद्र सूरि हैं। यह रूपक ग्रंथ है जिसमें भीम द्वारा वनवास में बकासुर को मारने की कथा है। वनमाला नाटिका, मल्लिकामकरंद प्रकरण, यदुविलास नाटक, रघुविलास नाटक रामचन्द्र सूरि के अन्य रूपक ग्रंथ हैं। रामचन्द्र सूरि जैन आचार्य थे। इनका समय संवत् 1145 से 1230 का है, इन्होंने संस्कृत में 11 नाटक लिखे हैं। इनके गुरु का नाम हेमचंद्र था।

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‘निर्भय-भीम-व्यायोग’ के लेखक रामचंद्र सूरि हैं। यह रूपक ग्रंथ है जिसमें भीम द्वारा वनवास में बकासुर को मारने की कथा है। वनमाला नाटिका, मल्लिकामकरंद प्रकरण, यदुविलास नाटक, रघुविलास नाटक रामचन्द्र सूरि के अन्य रूपक ग्रंथ हैं। रामचन्द्र सूरि जैन आचार्य थे। इनका समय संवत् 1145 से 1230 का है, इन्होंने संस्कृत में 11 नाटक लिखे हैं। इनके गुरु का नाम हेमचंद्र था।