Correct Answer:
Option C - ‘‘नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा’’ यह कहकर महर्षि वाल्मीकि का अभिवादन नलचम्पू में किया गया है।
कवि ने वाल्मीकि की वन्दना करते हुए विरोधाभास और श्लेष का जो आश्रय लिया है, वह विद्वद्वृन्द के द्वारा अत्यन्त प्रशंसनीय माना गया है।
सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।
नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा।।
रामायण की कथा में खर और दूषण राक्षस हैं, फिर भी कथा कोमल और निर्दोष है। इसी प्रकार सुन्दर काव्य की उपमा आम के फल से दी गई है जो कच्चा होने पर कठोर और पकने पर कोमल हो जाता है, इसी प्रकार काव्य में भी रसों के अनुकूल कहीं कठोरता और कहीं कोमलता होती है।
C. ‘‘नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा’’ यह कहकर महर्षि वाल्मीकि का अभिवादन नलचम्पू में किया गया है।
कवि ने वाल्मीकि की वन्दना करते हुए विरोधाभास और श्लेष का जो आश्रय लिया है, वह विद्वद्वृन्द के द्वारा अत्यन्त प्रशंसनीय माना गया है।
सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।
नमस्तस्मै कृता येन रम्या रामायणी कथा।।
रामायण की कथा में खर और दूषण राक्षस हैं, फिर भी कथा कोमल और निर्दोष है। इसी प्रकार सुन्दर काव्य की उपमा आम के फल से दी गई है जो कच्चा होने पर कठोर और पकने पर कोमल हो जाता है, इसी प्रकार काव्य में भी रसों के अनुकूल कहीं कठोरता और कहीं कोमलता होती है।