Correct Answer:
Option D - निम्न में से ‘वासुदेव’ शब्द में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। पूज्य–यहाँ पर मूल शब्द ‘पूज्’ एक क्रिया है जिसमें कृत प्रत्यय ‘य’ जुड़ने से बना शब्द ‘पूज्य’ कृदन्त शब्द कहा जाएगा। पाठक शब्द के अन्त में ‘अक’ प्रत्यय लगा है जो कि ‘कृत प्रत्यय’ है। पाठक में ‘पठ्’ धातु में ‘अक्’ प्रत्यय लगाकर पाठक शब्द बना है। करणीय में ‘ईय’ प्रत्यय लगाकर करणीय शब्द बना है।
तद्धित प्रत्यय– संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अन्त में लगने वाले प्रत्यय को ‘तद्धित’ प्रत्यय कहा जाता है और उनके मेल से बने शब्द को ‘तद्धितान्त’।
कृदन्त प्रत्यय– कृदन्त प्रत्यय धातु के साथ जुड़ते है। वे शब्द जो धातुओं के अंत में जुड़कर नए शब्दों की रचना करते हैं, कृदन्त प्रत्यय कहलाते है। जैसे– लड़ + आई (धातु + प्रत्यय) = लड़ाई।
D. निम्न में से ‘वासुदेव’ शब्द में तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। पूज्य–यहाँ पर मूल शब्द ‘पूज्’ एक क्रिया है जिसमें कृत प्रत्यय ‘य’ जुड़ने से बना शब्द ‘पूज्य’ कृदन्त शब्द कहा जाएगा। पाठक शब्द के अन्त में ‘अक’ प्रत्यय लगा है जो कि ‘कृत प्रत्यय’ है। पाठक में ‘पठ्’ धातु में ‘अक्’ प्रत्यय लगाकर पाठक शब्द बना है। करणीय में ‘ईय’ प्रत्यय लगाकर करणीय शब्द बना है।
तद्धित प्रत्यय– संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के अन्त में लगने वाले प्रत्यय को ‘तद्धित’ प्रत्यय कहा जाता है और उनके मेल से बने शब्द को ‘तद्धितान्त’।
कृदन्त प्रत्यय– कृदन्त प्रत्यय धातु के साथ जुड़ते है। वे शब्द जो धातुओं के अंत में जुड़कर नए शब्दों की रचना करते हैं, कृदन्त प्रत्यय कहलाते है। जैसे– लड़ + आई (धातु + प्रत्यय) = लड़ाई।