search
Q: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए— 1. जब गोला माध्य स्थान से गुजरता है, तो त्वरण शून्य होता है। 2. हर आवर्तन में दोलक दो बार किसी एक निर्दिष्ट वेग को प्राप्त करता है। 3. दोलक के दौरान जब गोला चरम सीमा पर पहुँचता है, तो उसकी गति और त्वरण दोनों शून्य होते हैं। 4. सामान्य दोलक का दोलन-आयाम समय के साथ-साथ कम होता जाता है। इन कथनों में कौन-से सही हैं?
  • A. 1 और 2
  • B. 3 और 4
  • C. 1, 2 और 4
  • D. 2, 3 और 4
Correct Answer: Option C - सरल आवर्त गति में दोलन करते हुए किसी पिण्ड द्वारा प्रत्येक वेग की स्थिति दो बार प्राप्त होती है। गोला द्वारा माध्य स्थिति में पहुँचने पर गतिज ऊर्जा अधिकतम, स्थितिज ऊर्जा तथा त्वरण शून्य होता है। आवर्त गति में अन्तिम अवस्था पर पहुँचने पर गतिज ऊर्जा शून्य तथा स्थितिज ऊर्जा एवं त्वरण अधिकतम होता है। एक सामान्य दोलक का दोलन आयाम घर्षण के कारण समय के साथ कम होता जाता है।
C. सरल आवर्त गति में दोलन करते हुए किसी पिण्ड द्वारा प्रत्येक वेग की स्थिति दो बार प्राप्त होती है। गोला द्वारा माध्य स्थिति में पहुँचने पर गतिज ऊर्जा अधिकतम, स्थितिज ऊर्जा तथा त्वरण शून्य होता है। आवर्त गति में अन्तिम अवस्था पर पहुँचने पर गतिज ऊर्जा शून्य तथा स्थितिज ऊर्जा एवं त्वरण अधिकतम होता है। एक सामान्य दोलक का दोलन आयाम घर्षण के कारण समय के साथ कम होता जाता है।

Explanations:

सरल आवर्त गति में दोलन करते हुए किसी पिण्ड द्वारा प्रत्येक वेग की स्थिति दो बार प्राप्त होती है। गोला द्वारा माध्य स्थिति में पहुँचने पर गतिज ऊर्जा अधिकतम, स्थितिज ऊर्जा तथा त्वरण शून्य होता है। आवर्त गति में अन्तिम अवस्था पर पहुँचने पर गतिज ऊर्जा शून्य तथा स्थितिज ऊर्जा एवं त्वरण अधिकतम होता है। एक सामान्य दोलक का दोलन आयाम घर्षण के कारण समय के साथ कम होता जाता है।