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Q: किस नाटक का अङ्गीरस करुणरस है?
  • A. महावीरचरितम्
  • B. उत्तररामचरितम्
  • C. वेणीसंहारम्
  • D. इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - उत्तररामचरितम् नाटक का अङ्गीरस करुण रस है। भवभूति ने इसे करुणरस-प्रधान नाटक माना है। एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद् भिन्न: पृथक् पृथगिव श्रयते विवर्तान। तृतीय अंक का प्रारम्भ करुण रस से ही होता है। पुटपाक प्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:।।
B. उत्तररामचरितम् नाटक का अङ्गीरस करुण रस है। भवभूति ने इसे करुणरस-प्रधान नाटक माना है। एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद् भिन्न: पृथक् पृथगिव श्रयते विवर्तान। तृतीय अंक का प्रारम्भ करुण रस से ही होता है। पुटपाक प्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:।।

Explanations:

उत्तररामचरितम् नाटक का अङ्गीरस करुण रस है। भवभूति ने इसे करुणरस-प्रधान नाटक माना है। एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद् भिन्न: पृथक् पृथगिव श्रयते विवर्तान। तृतीय अंक का प्रारम्भ करुण रस से ही होता है। पुटपाक प्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:।।