Correct Answer:
Option B - उत्तररामचरितम् नाटक का अङ्गीरस करुण रस है।
भवभूति ने इसे करुणरस-प्रधान नाटक माना है।
एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद्
भिन्न: पृथक् पृथगिव श्रयते विवर्तान।
तृतीय अंक का प्रारम्भ करुण रस से ही होता है।
पुटपाक प्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:।।
B. उत्तररामचरितम् नाटक का अङ्गीरस करुण रस है।
भवभूति ने इसे करुणरस-प्रधान नाटक माना है।
एको रस: करुण एव निमित्तभेदाद्
भिन्न: पृथक् पृथगिव श्रयते विवर्तान।
तृतीय अंक का प्रारम्भ करुण रस से ही होता है।
पुटपाक प्रतीकाशो रामस्य करुणो रस:।।