Q: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान पूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए- (89-93)
वैज्ञानिक आविष्कारों और बढ़ते हुए औद्योगीकरण के फलस्वरूप प्राणवायु सर्वाधिक दूषित और विषैली हो चली है। बेशुमार धुआँ उगलते कल-कारखाने, सड़कों, पेट्रोल और डी़जल का विषैला धुआँ सारे पर्यावरण को रुग्ण, विषैला और निर्जीव बना रहा है। कल-कारखानों से निकलने वाले कचरे के ढेर नदी-नालों और जलाशयों के निर्मल जल को प्रदूषित और .जहरीला बना रहे हैं। कचरे के बचे-खुचे ढेर से खुली भूमि पर सड़ते हुए.जहरीले, मोटरकारों और स्कूटरों का निरंतर बहता उमड़ता हुआ भारी शोर, कल-कारखानों के शोर को दुगुना करता हुआ हमें धीरे-धीरे बधिर बनाने पर तुला है। यदि इसी गति से हमारे पर्यावरण की स्थिति बद से बदतर होती गई तो मानव जीवन की समस्त आशाप्रद संभावनाएँ विनष्ट हो जाएँगी।
वैज्ञानिक आविष्कारों और बढ़ते औद्योगीकरण से-
A.
देश का विकास हुआ है।
B.
आर्थिक विकास तेजी से हुआ है।
C.
प्राणवायु दूषित और विषैली हो गई है।
D.
मनुष्य का जीवन आसान हो गया है।
Correct Answer:
Option C - उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार वैज्ञानिक आविष्कारों और बढ़ते औद्योगीकरण से प्राणवायु सर्वाधिक दूषित और विषैली हो गयी है।
C. उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार वैज्ञानिक आविष्कारों और बढ़ते औद्योगीकरण से प्राणवायु सर्वाधिक दूषित और विषैली हो गयी है।
Explanations:
उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार वैज्ञानिक आविष्कारों और बढ़ते औद्योगीकरण से प्राणवायु सर्वाधिक दूषित और विषैली हो गयी है।
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