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Q: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्न (89-93) का सटीक उत्तर दीजिए: भाग्य कठिन परिश्रम का ही दूसरा नाम है। जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए सार्थक श्रम करना चाहिए। श्रम से जहाँ आत्मीय सुख और शांति मिलती है वहीं वह दूसरों को भी प्रसन्नता से भर देता है। विश्व में जो देश आगे बढ़े हैं, उनकी सफलता का रहस्य वहाँ के निवासियों का कठिन परिश्रम ही है। दूसरे विश्वयुद्ध में जब जापान पर एटम बम-गिराया गया तो उसका बहुत ही विनाश हुआ। किन्तु महायुद्ध के बाद जापान के नागरिकों ने रात-दिन कठिन श्रम किया और आज अपने देश को दुनिया के विकसित देशों की पंक्ति में आगे लाकर खड़ा कर दिया। निम्नलिखित में श्रम से क्या नहीं मिलता है?
  • A. आत्मीय सुख
  • B. शांति
  • C. प्रसन्नता
  • D. प्रसिद्धि
Correct Answer: Option D - श्रम से प्रसिद्धि नहीं मिलती है बल्कि श्रम से आत्मीय सुख, समृद्धि और शांति मिलती है वहीं दूसरों को भी प्रसन्नता से भर देता है।
D. श्रम से प्रसिद्धि नहीं मिलती है बल्कि श्रम से आत्मीय सुख, समृद्धि और शांति मिलती है वहीं दूसरों को भी प्रसन्नता से भर देता है।

Explanations:

श्रम से प्रसिद्धि नहीं मिलती है बल्कि श्रम से आत्मीय सुख, समृद्धि और शांति मिलती है वहीं दूसरों को भी प्रसन्नता से भर देता है।