Correct Answer:
Option D - निरन्तरता का सिद्धान्त (Principle of continuity) यह प्रतिपादित करता है कि विकास जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है जिसका अंत नहीं होता है अर्थात् विकास की प्रक्रिया निरन्तर अविराम गति से चलती रहती है। कभी यह मंद गति से चलती है तथा कभी तीव्र गति से चलती है। विकास की प्रक्रिया में समग्रता का भाव निहित रहता है जिसके कारण विकास को अलग-अलग वायुरूद्ध सोपानों में नहीं बांटा जा सकता है। उदाहरणार्थ- प्रारम्भिक वर्षों में वृद्धि तथा विकास अत्यन्त तीव्र रहता है। उसके बाद के वर्षों में गति कुछ धीमी हो जाती है एवं वृद्धावस्था में लगभग नगण्य हो जाती है परन्तु विकास प्रक्रिया अनवरत लगातार चलती रहती है। इस सिद्धांत से यह निष्कर्ष निकलता है कि सामान्यत: विकास में अचानक कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता है।
D. निरन्तरता का सिद्धान्त (Principle of continuity) यह प्रतिपादित करता है कि विकास जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है जिसका अंत नहीं होता है अर्थात् विकास की प्रक्रिया निरन्तर अविराम गति से चलती रहती है। कभी यह मंद गति से चलती है तथा कभी तीव्र गति से चलती है। विकास की प्रक्रिया में समग्रता का भाव निहित रहता है जिसके कारण विकास को अलग-अलग वायुरूद्ध सोपानों में नहीं बांटा जा सकता है। उदाहरणार्थ- प्रारम्भिक वर्षों में वृद्धि तथा विकास अत्यन्त तीव्र रहता है। उसके बाद के वर्षों में गति कुछ धीमी हो जाती है एवं वृद्धावस्था में लगभग नगण्य हो जाती है परन्तु विकास प्रक्रिया अनवरत लगातार चलती रहती है। इस सिद्धांत से यह निष्कर्ष निकलता है कि सामान्यत: विकास में अचानक कोई आकस्मिक परिवर्तन नहीं होता है।