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Q: ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ के संस्थापकों में कौन नहीं थे?
  • A. बाबू श्याम सुन्दर दास
  • B. पं. रामनारायण मिश्र
  • C. रामचन्द्र वर्मा
  • D. ठाकुर शिव कुमार सिंह
Correct Answer: Option C - रामचन्द्र वर्मा ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ के संस्थापकों में नहीं थे। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना जुलाई 1893 ई. में काशी में हुई। इसके संस्थापक रामनारायण मिश्र, शिवकुमार सिंह और बाबू श्याम सुन्दर दास थे। इसके प्रथम अध्यक्ष बाबू राधाकृष्ण दास थे। इसका उद्देश्य हिन्दी के विकास हेतु पाण्डुलिपियों की खोज, अनुसंधान, साहित्यिक ग्रंथों का निर्माण एवं ग्रंथो का प्रकाशन था। 1896 में यहाँ से ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ का प्रकाशन शुरू हुआ।
C. रामचन्द्र वर्मा ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ के संस्थापकों में नहीं थे। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना जुलाई 1893 ई. में काशी में हुई। इसके संस्थापक रामनारायण मिश्र, शिवकुमार सिंह और बाबू श्याम सुन्दर दास थे। इसके प्रथम अध्यक्ष बाबू राधाकृष्ण दास थे। इसका उद्देश्य हिन्दी के विकास हेतु पाण्डुलिपियों की खोज, अनुसंधान, साहित्यिक ग्रंथों का निर्माण एवं ग्रंथो का प्रकाशन था। 1896 में यहाँ से ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ का प्रकाशन शुरू हुआ।

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रामचन्द्र वर्मा ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ के संस्थापकों में नहीं थे। नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना जुलाई 1893 ई. में काशी में हुई। इसके संस्थापक रामनारायण मिश्र, शिवकुमार सिंह और बाबू श्याम सुन्दर दास थे। इसके प्रथम अध्यक्ष बाबू राधाकृष्ण दास थे। इसका उद्देश्य हिन्दी के विकास हेतु पाण्डुलिपियों की खोज, अनुसंधान, साहित्यिक ग्रंथों का निर्माण एवं ग्रंथो का प्रकाशन था। 1896 में यहाँ से ‘नागरी प्रचारिणी सभा’ का प्रकाशन शुरू हुआ।