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Q: नीचे दिए गये गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सर्वोत्तम उत्तर चुनें। प्र.सं. (89-93) संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों में एक सीमा तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अंतर अवश्य आता है। राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परंपरा से संतृप्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की संपदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। इस अनुच्छेद का कोई उपयुक्त शीर्षक –
  • A. बाह्य उपादान
  • B. संस्कृति का प्रभाव
  • C. जातीय संस्कृति
  • D. आस्था की कमी
Correct Answer: Option B - दिये गये अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक ‘संस्कृति का प्रभाव’ होगा।
B. दिये गये अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक ‘संस्कृति का प्रभाव’ होगा।

Explanations:

दिये गये अनुच्छेद का उपयुक्त शीर्षक ‘संस्कृति का प्रभाव’ होगा।