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Q: ‘‘न हि प्रियं प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:’’ यह वचन कथित है
  • A. वनेचर के द्वारा
  • B. युधिष्ठिर के द्वारा
  • C. दुर्योधन के द्वारा
  • D. किरात के द्वारा
Correct Answer: Option A - ‘‘न हि प्रियं प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:’’ अर्थात् ‘‘हित चाहने वाले लोग प्रिय और झूठ कथन कहने की इच्छा नहीं करते’’ यह कथन किरातार्जुनीयम् में वनेचर द्वारा कहा गया है।
A. ‘‘न हि प्रियं प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:’’ अर्थात् ‘‘हित चाहने वाले लोग प्रिय और झूठ कथन कहने की इच्छा नहीं करते’’ यह कथन किरातार्जुनीयम् में वनेचर द्वारा कहा गया है।

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‘‘न हि प्रियं प्रवक्तुमिच्छन्ति मृषा हितैषिण:’’ अर्थात् ‘‘हित चाहने वाले लोग प्रिय और झूठ कथन कहने की इच्छा नहीं करते’’ यह कथन किरातार्जुनीयम् में वनेचर द्वारा कहा गया है।