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Q: महाकविबाणभट्टकृतकादम्बर्यन्तर्गत: ग्रन्थ:
  • A. वासवदत्ता
  • B. शुकनासोपदेश:
  • C. ऋग्वेदभाष्यभूमिका
  • D. वेदान्तसार:
Correct Answer: Option B - महाकविबाणभट्टकृतकादम्बर्यन्तर्गत: ग्रन्थ: शुकनासोपदेश:। महाकवि बाणभट्ट कृत कादम्बरी के अन्तर्गत शुकनासोपदेश ग्रन्थ आता है। ‘शुकनासोपदेश’ महाकवि बाणभट्ट द्वारा प्रणीत गद्यकाव्य ‘कादम्बरी’ का ही एक अंश है। इसमें उज्जयिनी के राजा तारापीड के मंत्री शुकनास द्वारा राजकुमार चन्द्रापीड को लोक व्यवहार के लिए उपयोगी उपदेश दिया गया है। इसीलिए इस अंश का नाम भी ‘शुकनासोपदेश’ रखा गया है। यह कादम्बरी का भावात्मक, हृदयस्पर्शी तथा चिन्तनीय प्रसङ्ग है, जिसे कादम्बरी का सारभूत तत्व कहा जा सकता है।
B. महाकविबाणभट्टकृतकादम्बर्यन्तर्गत: ग्रन्थ: शुकनासोपदेश:। महाकवि बाणभट्ट कृत कादम्बरी के अन्तर्गत शुकनासोपदेश ग्रन्थ आता है। ‘शुकनासोपदेश’ महाकवि बाणभट्ट द्वारा प्रणीत गद्यकाव्य ‘कादम्बरी’ का ही एक अंश है। इसमें उज्जयिनी के राजा तारापीड के मंत्री शुकनास द्वारा राजकुमार चन्द्रापीड को लोक व्यवहार के लिए उपयोगी उपदेश दिया गया है। इसीलिए इस अंश का नाम भी ‘शुकनासोपदेश’ रखा गया है। यह कादम्बरी का भावात्मक, हृदयस्पर्शी तथा चिन्तनीय प्रसङ्ग है, जिसे कादम्बरी का सारभूत तत्व कहा जा सकता है।

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महाकविबाणभट्टकृतकादम्बर्यन्तर्गत: ग्रन्थ: शुकनासोपदेश:। महाकवि बाणभट्ट कृत कादम्बरी के अन्तर्गत शुकनासोपदेश ग्रन्थ आता है। ‘शुकनासोपदेश’ महाकवि बाणभट्ट द्वारा प्रणीत गद्यकाव्य ‘कादम्बरी’ का ही एक अंश है। इसमें उज्जयिनी के राजा तारापीड के मंत्री शुकनास द्वारा राजकुमार चन्द्रापीड को लोक व्यवहार के लिए उपयोगी उपदेश दिया गया है। इसीलिए इस अंश का नाम भी ‘शुकनासोपदेश’ रखा गया है। यह कादम्बरी का भावात्मक, हृदयस्पर्शी तथा चिन्तनीय प्रसङ्ग है, जिसे कादम्बरी का सारभूत तत्व कहा जा सकता है।