Correct Answer:
Option D - अत्यधिक गहराई परत में जमने वाले मैग्मा को बैथोलिथ कहते हैं। ज्वालामुखी उद्गार के समय गर्म एवं तरल मैग्मा ऊपर उठता है, परन्तु धरातलीय अवरोध के कारण दरारों, छिद्रों एवं नली में ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है तो इस प्रकार की शैल का निर्माण होता है इन्हें मध्यवर्ती शैल कहते हैं, इनका निर्माण धरातल की सतह के नीचे होता है। इनमें प्रमुख है–
बैथोलिथ, फैकोलिथ, लैपोलिथ, डाइक, सिल और नेक। इसमें बैथोलिथ का आधार तल अत्यधिक गहराई में होता है।
D. अत्यधिक गहराई परत में जमने वाले मैग्मा को बैथोलिथ कहते हैं। ज्वालामुखी उद्गार के समय गर्म एवं तरल मैग्मा ऊपर उठता है, परन्तु धरातलीय अवरोध के कारण दरारों, छिद्रों एवं नली में ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है तो इस प्रकार की शैल का निर्माण होता है इन्हें मध्यवर्ती शैल कहते हैं, इनका निर्माण धरातल की सतह के नीचे होता है। इनमें प्रमुख है–
बैथोलिथ, फैकोलिथ, लैपोलिथ, डाइक, सिल और नेक। इसमें बैथोलिथ का आधार तल अत्यधिक गहराई में होता है।