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Q: ‘मेघदूतम्’ में यक्ष ने शापान्त की अवधि मानी है :
  • A. तीन माह
  • B. चार माह
  • C. दो माह
  • D. एक माह
Correct Answer: Option B - अपनी कर्तव्यनिष्ठा का पालन न कर सकने के कारण कुबेर ने यक्ष को एक वर्ष के लिए अपनी प्रिया (पत्नी) से अलग रहने का श्राप देते हैं। प्रिया के विरह से व्यथित उस कामुक यक्ष ने रामगिरि पर्वत पर 8 महीने व्यतीत कर दिया। इस प्रकार मेघदूतम् में शापान्त की अवधि चार माह कही गयी है।
B. अपनी कर्तव्यनिष्ठा का पालन न कर सकने के कारण कुबेर ने यक्ष को एक वर्ष के लिए अपनी प्रिया (पत्नी) से अलग रहने का श्राप देते हैं। प्रिया के विरह से व्यथित उस कामुक यक्ष ने रामगिरि पर्वत पर 8 महीने व्यतीत कर दिया। इस प्रकार मेघदूतम् में शापान्त की अवधि चार माह कही गयी है।

Explanations:

अपनी कर्तव्यनिष्ठा का पालन न कर सकने के कारण कुबेर ने यक्ष को एक वर्ष के लिए अपनी प्रिया (पत्नी) से अलग रहने का श्राप देते हैं। प्रिया के विरह से व्यथित उस कामुक यक्ष ने रामगिरि पर्वत पर 8 महीने व्यतीत कर दिया। इस प्रकार मेघदूतम् में शापान्त की अवधि चार माह कही गयी है।