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Q: विकास का शिर:पदाभिमुख दिशा सिद्धान्त व्याख्या करता है कि विकास इस प्रकार आगे बढ़ता है–
  • A. सामान्य से विशिष्ट कार्यों की ओर
  • B. भिन्न से एकीकृत कार्यों की ओर
  • C. सिर से पैर की ओर
  • D. ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर
Correct Answer: Option C - शिर:पदाभिमुख (मस्तकाधोमुखी) में शारीरिक विकास सिर से पैर की दिशा में होता है। प्रयोगात्मक अध्ययनों के आधार पर यह दिखाया गया है कि प्रसूतिकाल तथा जन्म के बाद के समय में बच्चों का शारीरिक विकास तथा मानसिक विकास दो प्रकार के नियमों से निर्देशित होता है – मस्तकाधोमुखी नियम तथा निकट दूर नियम। इन दोनों नियमों को मिलाकर एक साथ विकासात्मक दिशा का नियम कहा जाता है।
C. शिर:पदाभिमुख (मस्तकाधोमुखी) में शारीरिक विकास सिर से पैर की दिशा में होता है। प्रयोगात्मक अध्ययनों के आधार पर यह दिखाया गया है कि प्रसूतिकाल तथा जन्म के बाद के समय में बच्चों का शारीरिक विकास तथा मानसिक विकास दो प्रकार के नियमों से निर्देशित होता है – मस्तकाधोमुखी नियम तथा निकट दूर नियम। इन दोनों नियमों को मिलाकर एक साथ विकासात्मक दिशा का नियम कहा जाता है।

Explanations:

शिर:पदाभिमुख (मस्तकाधोमुखी) में शारीरिक विकास सिर से पैर की दिशा में होता है। प्रयोगात्मक अध्ययनों के आधार पर यह दिखाया गया है कि प्रसूतिकाल तथा जन्म के बाद के समय में बच्चों का शारीरिक विकास तथा मानसिक विकास दो प्रकार के नियमों से निर्देशित होता है – मस्तकाधोमुखी नियम तथा निकट दूर नियम। इन दोनों नियमों को मिलाकर एक साथ विकासात्मक दिशा का नियम कहा जाता है।