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Q: ‘‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि’’ यह सुभाषित है
  • A. रघुवंश में
  • B. उत्तररामचरित में
  • C. अभिज्ञान शाकुन्तल में
  • D. वेणीसंहार में
Correct Answer: Option B - ‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि’ यह सूक्ति उत्तराम चरितम् की है। ‘‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुर्महति।।’’ अर्थात् - वज्रा से भी कठोर और फूल से भी कोमल महापुरुषों के चित्त को कौन जान सकता है?
B. ‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि’ यह सूक्ति उत्तराम चरितम् की है। ‘‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुर्महति।।’’ अर्थात् - वज्रा से भी कठोर और फूल से भी कोमल महापुरुषों के चित्त को कौन जान सकता है?

Explanations:

‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि’ यह सूक्ति उत्तराम चरितम् की है। ‘‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि। लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुर्महति।।’’ अर्थात् - वज्रा से भी कठोर और फूल से भी कोमल महापुरुषों के चित्त को कौन जान सकता है?