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Q: ‘‘लीक पर वे चलें जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं, हमें तो जो हमारी यात्रा से बने इन पंक्तियों के सृजेता हैं
  • A. भाारत भूषण अग्रवाल
  • B. सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
  • C. चन्द्रकान्त देवताले
  • D. भवानी प्रसाद मिश्र
Correct Answer: Option B - उपर्युक्त पंक्तियों के सृजेता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हैं। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का जन्म सन् 1927 ई. में बस्ती (उ.प्र.) में तथा निधन सन् 1983 ई. में हुआ। सर्वेश्वर जी ‘नई कविता’ के प्रमुख कवि हैं। जंगल का दर्द, कुआनोनदी, गर्म हवाएँ, खूँटियों पर टंगे लोग आदि इनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। ‘बतूता का जूता’ इनकी बाल कविताओं का काव्य संग्रह हैं।
B. उपर्युक्त पंक्तियों के सृजेता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हैं। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का जन्म सन् 1927 ई. में बस्ती (उ.प्र.) में तथा निधन सन् 1983 ई. में हुआ। सर्वेश्वर जी ‘नई कविता’ के प्रमुख कवि हैं। जंगल का दर्द, कुआनोनदी, गर्म हवाएँ, खूँटियों पर टंगे लोग आदि इनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। ‘बतूता का जूता’ इनकी बाल कविताओं का काव्य संग्रह हैं।

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उपर्युक्त पंक्तियों के सृजेता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी हैं। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी का जन्म सन् 1927 ई. में बस्ती (उ.प्र.) में तथा निधन सन् 1983 ई. में हुआ। सर्वेश्वर जी ‘नई कविता’ के प्रमुख कवि हैं। जंगल का दर्द, कुआनोनदी, गर्म हवाएँ, खूँटियों पर टंगे लोग आदि इनके प्रमुख काव्य संग्रह हैं। ‘बतूता का जूता’ इनकी बाल कविताओं का काव्य संग्रह हैं।