हाल ही में किस बैंक ने 'सम्मान' रुपे क्रेडिट कार्ड लांच किया है?
ओलम्पिक्स में किस खेल में भारत को सबसे अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त हुए हैं?
In the context of inclusive education, which opportunities is included in inclusion ? समावेशी शिक्षा के संदर्भ में समावेश में कौन से अवसर शामिल हैं? I. Opportunities to participate in the full range of social activities. I. सामाजिक गतिविधियों की पूरी श्रृंखला में भाग लेने के अवसर। II. Opportunities of art, sports and music opportunities. II. कला, खेल और संगीत के अवसर।
सुख-सुविधाओं के अतिरिक्त विज्ञान ने जो सबसे बड़ी चीज हमें दी है वह अमूल्य निधि है – जीवन के प्रति तार्किक पद्धति। विज्ञान ने मनुष्य को एक तर्क संगत और व्यावहारिक दृष्टि दी है, जिसके कारण अंध-विश्वास और जड़ता का कुहासा छँटता जा रहा है। जर्जर विकृत परम्पराएँ ध्वस्त हो रही हैं। विज्ञान ने मनुष्य को सत्य-असत्य, उचित-अनुचित को परखने का और वस्तुगत विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकालने का दृष्टिकोण प्रदान किया है। मनुष्य ने जीवन के प्रत्येक पहलू को कारण और कार्य की कसौटी पर कसकर आगे बढ़ाना सीख लिया है। Q. मनुष्य ने आगे बढ़ना सीख लिया है?
ऐसे स्थानों पर जहाँ बिजली उपलब्ध नहीं होती, ड्रिलिंग करने के लिए निम्न मशीन का उपयोग किया जाता है
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में किस भारतीय संस्थान ने भारत में पहला स्थान हासिल किया है? (a) आईआईटी बॉम्बे (b) आईआईटी दिल्ली (c) आईआईटी मद्रास (d) आईआईएससी बेंगलुरु
The theory of continental drift was developed by/महाद्वीपीय बहाव का सिद्धांत किसके द्वारा विकसित किया गया था?
Which of the following places of Madhya Pradesh is also known as ‘Satpura Ki Rani’? मध्य प्रदेश के निम्नलिखित स्थानों में से कौन-सा `सतपुरा की रानी' के नाम से भी जाना जाता है?
निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहींं है?
निर्देश (प्र.सं. H-15 से H-20 तक) : इस खंड में नीचे दिए गए गद्यांश से सम्बन्धित प्रश्न दिए गए हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में अंकित कीजिये। विकास क्रम में पशुता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मनुष्यता हमारे युग-युगांतर के अनवतर अध्यवसाय से अर्जित अमूल्य निधि। इसी से हम अपने पूर्व स्वप्न के लिए, सामंजस्यपूर्ण आदर्श के लिए और भावनाओं के लिए प्राण की बाजी लगाते रहे हैं। जब हम से ऐसा करने की शक्ति शेष नहीं रह जाती तब हम एक मिथ्या दम्भ के साथ पशुता की ओर लौट चलते हैं क्योंकि वहाँ पहुँचने के लिए न किसी पराक्रम की आवश्यकता है और न साधन की। हम अपने शरीर को निश्चेष्ट छोड़कर हिमालय के शिखर से पाताल की गहराई तक सहज ही लुढ़कते चले आ सकते हैं। परंतु उसे ऊंचाई के सहस्र अंशो तक पहुँचने में हमारे पाँव काँपने लगेंगे, साँस फूलने लगेगी और आँखों के सामने अंधेरा छा जाएगा। प्रारम्भ में मुद्रित अंश आशय है कि
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