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Q: कथन (A) : गढ़वाल में सीढ़ीदार कृषि पारिस्थितिकी मित्र है। कारण (R) : यह पहाड़ी ढालों पर भूमि तथा जल संरक्षण का समुचित उपाय है। कूट :
  • A. A और R दोनों सही है और R, A की सही व्याख्या है
  • B. A और R दोनों सही है परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है
  • C. A सही है, परन्तु R गलत है
  • D. A गलत है, परन्तु R सही है
Correct Answer: Option A - उत्तरांचल राज्य की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है। उत्तरांचल राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां विषम होने के कारण कृषि क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया है। पर्वतीय राज्य होने के कारण कृषि योग्य समतल भूमि का अभाव है तथा पहाड़ी क्षेत्रों के खेतों की ढलान अधिक होने से जल द्वारा मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीनुमा कृषि या कंटूर खेती की जाती है। कंटूर खेती में जल अवरोधित हो जाने से मिट्टी के कटाव के संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने वाले पोषणीय तत्व भी सुरक्षित रह जाते हैं।
A. उत्तरांचल राज्य की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है। उत्तरांचल राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां विषम होने के कारण कृषि क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया है। पर्वतीय राज्य होने के कारण कृषि योग्य समतल भूमि का अभाव है तथा पहाड़ी क्षेत्रों के खेतों की ढलान अधिक होने से जल द्वारा मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीनुमा कृषि या कंटूर खेती की जाती है। कंटूर खेती में जल अवरोधित हो जाने से मिट्टी के कटाव के संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने वाले पोषणीय तत्व भी सुरक्षित रह जाते हैं।

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उत्तरांचल राज्य की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है। उत्तरांचल राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां विषम होने के कारण कृषि क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पाया है। पर्वतीय राज्य होने के कारण कृषि योग्य समतल भूमि का अभाव है तथा पहाड़ी क्षेत्रों के खेतों की ढलान अधिक होने से जल द्वारा मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीनुमा कृषि या कंटूर खेती की जाती है। कंटूर खेती में जल अवरोधित हो जाने से मिट्टी के कटाव के संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को बनाये रखने वाले पोषणीय तत्व भी सुरक्षित रह जाते हैं।