Correct Answer:
Option D - झूम स्थानान्तरणशील कृषि का ही रूप है यह कृषि का सर्वाधिक प्राचीन रूप है जो मुख्यत: उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाली जनजातियों के द्वारा की जाती है इस प्रकार की कृषि में वनो के छोटे भू भाग में वृक्षों एवं झाडि़यों को काटकर या जलाकर साफ किया जाता है फिर उसकी उपजाऊ शक्ति समाप्त होने तक उस पर कृषि की जाती है। जमीन के अनुपजाऊ होने पर दूसरी नई भूमि पर पुन: यही क्रिया दोहराई जाती है। भारत के पूर्वोत्तर भाग की जनजातियों द्वारा झूम कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है।
राज्य क्षेत्र स्थानान्तरण शील कृषि (झूम)
मध्य प्रदेश – बेवर, दहिया
आन्ध्र प्रदेश – पोंडु
ओडिशा – कमान, विंगा, धावी
केरल – कुमारी
राजस्थान – बत्रा
दक्षिण भारत – जारा एवं एरका
D. झूम स्थानान्तरणशील कृषि का ही रूप है यह कृषि का सर्वाधिक प्राचीन रूप है जो मुख्यत: उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाली जनजातियों के द्वारा की जाती है इस प्रकार की कृषि में वनो के छोटे भू भाग में वृक्षों एवं झाडि़यों को काटकर या जलाकर साफ किया जाता है फिर उसकी उपजाऊ शक्ति समाप्त होने तक उस पर कृषि की जाती है। जमीन के अनुपजाऊ होने पर दूसरी नई भूमि पर पुन: यही क्रिया दोहराई जाती है। भारत के पूर्वोत्तर भाग की जनजातियों द्वारा झूम कृषि बड़े पैमाने पर की जाती है।
राज्य क्षेत्र स्थानान्तरण शील कृषि (झूम)
मध्य प्रदेश – बेवर, दहिया
आन्ध्र प्रदेश – पोंडु
ओडिशा – कमान, विंगा, धावी
केरल – कुमारी
राजस्थान – बत्रा
दक्षिण भारत – जारा एवं एरका