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Q: कादम्बरीमतिरिच्य बाणभट्टस्य द्वितीयं गद्यकाव्यं किम्?
  • A. दशकुमारचरितम्
  • B. वासवदत्ता
  • C. हर्षचरितम्
  • D. तिलकमञ्जरी
Correct Answer: Option C - कादम्बरीमतिरिच्य बाणभट्टस्य द्वितीयं गद्यकाव्यं ‘हर्षचरितम्’ अस्ति। अर्थात् कादम्बरी के अतिरिक्त बाणभट्ट का द्वितीय गद्यकाव्य ‘हर्षचरित’ है। यह इतिहास प्रसिद्ध गद्यकाव्य के भेद से आख्यायिका ग्रन्थ है इसमें आठ उच्छवास हैं, अत: विकल्प (c) सही है शेष अन्य विकल्प ‘दशकुमारचरितम्’ दण्डी की, ‘वासवदत्ता’ सुबन्धु की तथा ‘तिलकमञ्जरी’ धनपाल की गद्य रचना है।
C. कादम्बरीमतिरिच्य बाणभट्टस्य द्वितीयं गद्यकाव्यं ‘हर्षचरितम्’ अस्ति। अर्थात् कादम्बरी के अतिरिक्त बाणभट्ट का द्वितीय गद्यकाव्य ‘हर्षचरित’ है। यह इतिहास प्रसिद्ध गद्यकाव्य के भेद से आख्यायिका ग्रन्थ है इसमें आठ उच्छवास हैं, अत: विकल्प (c) सही है शेष अन्य विकल्प ‘दशकुमारचरितम्’ दण्डी की, ‘वासवदत्ता’ सुबन्धु की तथा ‘तिलकमञ्जरी’ धनपाल की गद्य रचना है।

Explanations:

कादम्बरीमतिरिच्य बाणभट्टस्य द्वितीयं गद्यकाव्यं ‘हर्षचरितम्’ अस्ति। अर्थात् कादम्बरी के अतिरिक्त बाणभट्ट का द्वितीय गद्यकाव्य ‘हर्षचरित’ है। यह इतिहास प्रसिद्ध गद्यकाव्य के भेद से आख्यायिका ग्रन्थ है इसमें आठ उच्छवास हैं, अत: विकल्प (c) सही है शेष अन्य विकल्प ‘दशकुमारचरितम्’ दण्डी की, ‘वासवदत्ता’ सुबन्धु की तथा ‘तिलकमञ्जरी’ धनपाल की गद्य रचना है।