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Q: `कथां प्रमत: प्रथमं कृतामिव'- यह श्लोकांश है–
  • A. नीतिशतकम्
  • B. किरातार्जुनीयम्
  • C. मेघदूतम्
  • D. अभिज्ञानशाकुन्तलम्
Correct Answer: Option D - महाराज दुष्यन्त के वियोग में शकुन्तला उनकी स्मृति में खोई हुई थी। द्वार पर आये दुर्वासा ऋषि का उसके द्वारा अनादर हो जाता है। परिणामत: वह ऋषिवर के शाप का भाजन बनती है कि जिस प्रकार मुझ जैसे द्वार पर आये हुए का तुमने तिरस्कार किया है, उसी तरह जब तुम अपने पति घर जाओगी तो तुम्हारे याद दिलाने पर भी तुम्हारा पति जैसे एक प्रमत्त (मदमत्त) व्यक्ति अपने पूर्व की बातों को भूल जाता हैै उसी प्रकार वह भी भूल जायेगा।
D. महाराज दुष्यन्त के वियोग में शकुन्तला उनकी स्मृति में खोई हुई थी। द्वार पर आये दुर्वासा ऋषि का उसके द्वारा अनादर हो जाता है। परिणामत: वह ऋषिवर के शाप का भाजन बनती है कि जिस प्रकार मुझ जैसे द्वार पर आये हुए का तुमने तिरस्कार किया है, उसी तरह जब तुम अपने पति घर जाओगी तो तुम्हारे याद दिलाने पर भी तुम्हारा पति जैसे एक प्रमत्त (मदमत्त) व्यक्ति अपने पूर्व की बातों को भूल जाता हैै उसी प्रकार वह भी भूल जायेगा।

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महाराज दुष्यन्त के वियोग में शकुन्तला उनकी स्मृति में खोई हुई थी। द्वार पर आये दुर्वासा ऋषि का उसके द्वारा अनादर हो जाता है। परिणामत: वह ऋषिवर के शाप का भाजन बनती है कि जिस प्रकार मुझ जैसे द्वार पर आये हुए का तुमने तिरस्कार किया है, उसी तरह जब तुम अपने पति घर जाओगी तो तुम्हारे याद दिलाने पर भी तुम्हारा पति जैसे एक प्रमत्त (मदमत्त) व्यक्ति अपने पूर्व की बातों को भूल जाता हैै उसी प्रकार वह भी भूल जायेगा।