Correct Answer:
Option A - सरल रेखा पद्धति- इस पद्धति को स्थायी प्रभाग व किस्त पद्धति के नाम से भी जाना जाता है। इस पद्धति के अनुसार ह्रास की राशि प्रतिवर्ष सामान रहती है। यह विधि बहुत ही आसानी से प्रयोग की जाती है। यह पद्धति स्थायी सम्पत्ति, कम मूल्य वाली सम्पत्तियों के लिये ज्यादा उपयोगी होती है। इसमें लेखांकन मानक 6 का प्रयोग होता है जो कि ICAI द्वारा निर्ममित किया गया। यह पद्धति लागत लेखा एवं आय लेखा दोनों के लिए विश्वसनीय है।
A. सरल रेखा पद्धति- इस पद्धति को स्थायी प्रभाग व किस्त पद्धति के नाम से भी जाना जाता है। इस पद्धति के अनुसार ह्रास की राशि प्रतिवर्ष सामान रहती है। यह विधि बहुत ही आसानी से प्रयोग की जाती है। यह पद्धति स्थायी सम्पत्ति, कम मूल्य वाली सम्पत्तियों के लिये ज्यादा उपयोगी होती है। इसमें लेखांकन मानक 6 का प्रयोग होता है जो कि ICAI द्वारा निर्ममित किया गया। यह पद्धति लागत लेखा एवं आय लेखा दोनों के लिए विश्वसनीय है।