Correct Answer:
Option A - ‘‘पृथ्वीराज रासो’’ मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।’’ यह कथन धीरेन्द्र वर्मा का है।
• चन्दवरदाई कृत ‘पृथ्वीराज रासो’ महाकाव्य 13वीं शती की रचना है। इसमें 69 सर्ग (समय) है।
• आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में लिखा है – पृथ्वीराज रासो ढाई हजार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रंथ है जिसमें 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं। प्राचीन समय में प्रचलित प्राय: सभी छंदों का व्यवहार हुआ है। मुख्य छंद है कवित्त (छप्पय), दूहा, तोमर, त्रोटक, गाहा और आर्या।
• चंदवरदाई ने अपने पुत्र जल्हण के हाथ में रासो की पुस्तक देकर उसे पूर्ण करने का संकेत किया।
A. ‘‘पृथ्वीराज रासो’’ मध्यकालीन ब्रजभाषा में ही लिखा गया है, पुरानी राजस्थानी में नहीं, जैसा कि साधारणतया इस विषय में माना जाता है।’’ यह कथन धीरेन्द्र वर्मा का है।
• चन्दवरदाई कृत ‘पृथ्वीराज रासो’ महाकाव्य 13वीं शती की रचना है। इसमें 69 सर्ग (समय) है।
• आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में लिखा है – पृथ्वीराज रासो ढाई हजार पृष्ठों का बहुत बड़ा ग्रंथ है जिसमें 69 समय (सर्ग या अध्याय) हैं। प्राचीन समय में प्रचलित प्राय: सभी छंदों का व्यवहार हुआ है। मुख्य छंद है कवित्त (छप्पय), दूहा, तोमर, त्रोटक, गाहा और आर्या।
• चंदवरदाई ने अपने पुत्र जल्हण के हाथ में रासो की पुस्तक देकर उसे पूर्ण करने का संकेत किया।