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Q: ‘कितौ मिठास दई दयो इते सलोने रूप।’ –काव्य पंक्ति में अलंकार है
  • A. रूपक
  • B. उपमा
  • C. विरोधाभास
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - ‘कितौ मिठास दई दयो इते सलोने रूप।’ काव्य पंक्ति में विरोधाभास अलंकार है। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोधाभास अलंकार होता है। जैसे-सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर तड़ाग जहाँ। ⇒ रूपक अलंकार-जहाँ उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे-मुख-चंद्र। आशय है-मुख ही चन्द्रमा है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के सीमप रखकर तोलना। जैसे-राधा, रति के समान सुन्दरी है।
C. ‘कितौ मिठास दई दयो इते सलोने रूप।’ काव्य पंक्ति में विरोधाभास अलंकार है। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोधाभास अलंकार होता है। जैसे-सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर तड़ाग जहाँ। ⇒ रूपक अलंकार-जहाँ उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे-मुख-चंद्र। आशय है-मुख ही चन्द्रमा है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के सीमप रखकर तोलना। जैसे-राधा, रति के समान सुन्दरी है।

Explanations:

‘कितौ मिठास दई दयो इते सलोने रूप।’ काव्य पंक्ति में विरोधाभास अलंकार है। ⇒ विरोधाभास अलंकार-जब दो विरोधी पदार्थों का संयोग एक साथ दिखाया जाय, तब विरोधाभास अलंकार होता है। जैसे-सुलगी अनुराग की आग वहाँ, जल से भरपूर तड़ाग जहाँ। ⇒ रूपक अलंकार-जहाँ उपमेय को उपमान के रूप में दिखाया जाय, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे-मुख-चंद्र। आशय है-मुख ही चन्द्रमा है। ⇒ उपमा अलंकार-जहाँ एक वस्तु की समता दूसरी वस्तु से की जाय, वहाँ उपमा अलंकार होता है। ‘उप’ का अर्थ होता है समीप, ‘मा’ का मापना या तोलना। अत: उपमा का अर्थ है दो वस्तुओं को एक दूसरे के सीमप रखकर तोलना। जैसे-राधा, रति के समान सुन्दरी है।