Explanations:
जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। इसके अभाव में प्रकृतिदत्त शक्तियों का उचित प्रयोग नहीं हो सकता है। अनुशासन द्वारा ही व्यक्ति अच्छी शक्ति प्राप्त करता है और इस शक्ति को वह अपनी नैसर्गिक प्रवृत्तियों का विकास करने में समर्थ होता है। महान दार्शनिक अफलातून का कहना था – ‘‘एक राष्ट्र का निर्माण चट्टानों तथा वृक्षों से नहीं किया जाता है, वरन् उसके नागारिकों के चरित्र से निर्मित किया जाता है।’’ अनुशासन की स्थापना करने के लिए निम्न सिद्धान्त बताए गए हैं– (1) अनुशासन का आधार प्रेम, विश्वास तथा सद्भावना हो, क्योंकि भय अथवा संशय पर आधारित अनुशासन क्षणिक होता है। सच्चे अनुशासन की स्थापना के लिए विद्यालय अधिकारियों- प्रधानाध्यापक, शिक्षक वर्ग आदि तथा बालकों के बीच पारस्परिक प्रेम होना चाहिए। (2) आगमनात्मक तकनीक की भावना अकर्षक तकनीक है, जिसे बच्चे के तर्क और निष्पक्षता की भावना को आकर्षित करके वांछनीय व्यवहार को प्रेरित करने के लिए डिजाइन किया गया है। (3) अभिभावकों को पारिवारिक जीवन को सुन्दर व सुखमय बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, क्योंकि बालक का अधिकांश समय अपने घर पर ही व्यतीत होता है। यदि वहाँ का जीवन अनुपयुक्त एवं दूषित है तो विद्यालय के सद्प्रयासों के असफल होने की सम्भावना रहेगी। अत: विभिन्न साधनों द्वारा अभिभावकों को अपने पारिवारिक जीवन को उपयुक्त एवं सामंजस्यपूर्ण बनाने के लिए प्रेरणा दी जाए। (4) माता-पिता के नियंत्रण में शारीरिक या मौखिक प्रवर्तन के माध्यम से अवांछनीय व्यवहार को हतोत्साहित करने के लिए डिजाइन की गई अनुशासनात्मक रणनीति शक्ति निश्चयन होती है। अत: उपयुक्त दिए गए कथन (I) व (II) दोनों ही अनुशासन के संदर्भ में सही है।